
नवादा, मनीष कुमार (अमर गाथा) । बिहार सरकार एक तरफ सुदूर ग्रामीण इलाकों को मुख्य मार्गों से जोड़ने और ग्रामीण परिवहन को सुदृढ़ करने के लिए ‘ग्रामीण टोला सम्पर्क निश्चय योजना’ और ‘ग्रामीण सड़क सुदृढ़ीकरण एवं प्रबंधन कार्यक्रम’ जैसी भारी-भरकम योजनाओं का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत इन दावों की धज्जियां उड़ाती नजर आ रही है।रजौली प्रखंड के अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग 31 से हरदिया सेक्टर-ए महादलित टोला तथा हरदिया पुनर्वास सेक्टर (बी) को जोड़ने वाले मार्ग इसके जीते-जागते उदाहरण बन चुके हैं। सरकारी विडंबना का आलम यह है कि सड़कों के मुहाने पर लाखों-करोड़ों रुपयों के बजट और रखरखाव के लंबे-चौड़े दावों वाले चमचमाते बोर्ड तो शान से खड़े हैं, लेकिन उनके ठीक पीछे की सड़कें पूरी तरह से ध्वस्त होकर मलबे के ढेर में तब्दील हो रही है।
कागजों पर लाखों का बजट और दावों की लंबी फेहरिस्त
विभाग की कार्यशैली और ठेकेदारों की लापरवाही का सच इन सड़कों पर साफ देखा जा सकता है। कागजी दावों के मुताबिक, एनएच-31 से हरदिया सेक्टर-ए महादलित टोला पथ की लंबाई करीब 1.100 किलोमीटर है, जिसके निर्माण और पांच वर्षों के रख-रखाव के लिए कुल 57.12066 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि आवंटित की गई है। इस योजना के तहत मूल कार्य की राशि 43.09324 लाख रुपये, संचालन एवं प्रबंधन के लिए 4.06071 लाख रुपये और पांचवें साल में सड़कों के कालीकरण के लिए 2.02606 लाख रुपये का ब्योरा सरकारी बोर्ड पर बड़े-बड़े अक्षरों में अंकित है। संवेदक संजय कुमार और कार्यकारी एजेंसी ग्रामीण कार्य विभाग (कार्य प्रमंडल, रजौली) के तहत इस कार्य की शुरुआत 12 जून 2025 को हुई और इसे 11 जून 2026 तक पूरा होना है। इसके अलावा बोर्ड पर यह भी स्पष्ट दावा किया गया है कि संचालन अवधि के दौरान होने वाले किसी भी गड्ढे या पैचिंग कार्य को सात दिनों के भीतर और धंसान को चौदह दिनों के भीतर दुरुस्त कर दिया जाएगा, जिसके लिए बाकायदा वर्ष 2026 से लेकर 2032 तक का वार्षिक बजटीय प्रावधान भी तय किया गया है।
इसी तरह पास ही स्थित दूसरे पथ ‘एनएच-31 से सेक्टर सी, हरदिया पुनर्वास सेक्टर (बी)’ के बोर्ड पर भी वर्ष 2019 से 2024 तक के अनुरक्षण के नाम पर 2.31 लाख रुपये से अधिक खर्च करने का ब्योरा दर्ज है। सरकारी कागजों में तो हर साल घास की कटाई, नालियों की सफाई, शोल्डर का अनुरक्षण और सड़कों की मरम्मत समय-सीमा के भीतर नियमित रूप से दिखाई गई है।
धरातल पर कंक्रीट का मलबा और झांकता भ्रष्टाचार
जैसे ही कोई इस सूचना पट्ट से नजर हटाकर धरातल पर बनी कंक्रीट की सड़कों को देखता है, वैसे ही विकास का यह खोखला महल ताश के पत्तों की तरह ढह जाता है। मुख्य मार्ग से आगे बढ़ते ही सड़क पूरी तरह बीच से टूटकर बिखर चुकी है। कंक्रीट के बड़े-बड़े ब्लॉक उखड़ गए हैं, गहरी दरारें पड़ चुकी हैं और पूरी सड़क मलबे, पत्थरों और कंकड़-बजरी के ढेर में तब्दील हो चुकी है। सड़क के टूटे हुए हिस्सों के नीचे से सुरक्षा के लिए बिछाई गई प्लास्टिक और घटिया निर्माण सामग्री साफ तौर पर बाहर झांक रही है, जो सीधे तौर पर निर्माण कार्य में हुए बड़े भ्रष्टाचार और तकनीकी खामियों की गवाही देती है।
दुर्घटनाओं को आमंत्रण और ग्रामीणों में भारी आक्रोश
स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों के लिए इस मार्ग से गुजरना किसी दुःस्वप्न से कम नहीं है। दोपहिया वाहन चालक आए दिन इन गहरी दरारों और बिखरे पत्थरों के कारण असंतुलित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं, वहीं पैदल चलने वाले बुजुर्गों और बच्चों के लिए भी यह रास्ता बेहद खतरनाक साबित हो रहा है। स्थानीय निवासियों में विभाग और संवेदक के खिलाफ गहरा आक्रोश व्याप्त है। सुदर्शन सिंह, सरयू सिंह, मदन रजक आदि ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और ठेकेदारों की मिलीभगत के कारण केवल बोर्ड लगाकर और कागजों पर रखरखाव का खर्च दिखाकर जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा ठिकाने लगाया जा रहा है।लाखों रुपये के इस बजट के बावजूद अगर सात दिनों में गड्ढे भरने और सड़कों को दुरुस्त करने का नियम धरातल पर नहीं उतर पा रहा है, तो यह सीधे तौर पर प्रशासनिक तंत्र की संवेदनहीनता को दर्शाता है। मानसून की आहट के साथ ही इस टूटी सड़क की स्थिति और भयावह होने की आशंका है, जिससे इस महादलित टोले और पुनर्वास क्षेत्र का संपर्क मुख्य मार्ग से पूरी तरह कट सकता है। अब देखना यह होगा कि क्या उच्चाधिकारी इस बदहाली का संज्ञान लेकर संवेदक पर कोई कड़ी कार्रवाई करते हैं या फिर ग्रामीण इसी तरह कागजी विकास के बोर्ड के साए में इस जर्जर और जानलेवा मार्ग पर चलने को मजबूर रहेंगे।
विभाग ने दिया जांच का आश्वासन
मामले पर ग्रामीण कार्य विभाग कार्य प्रमंडल रजौली के कार्यपालक अभियंता अरविंद कुमार ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है। उन्होंने जांच कर अग्रतर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। ग्रामीणों ने दोषी संवेदक पर कार्रवाई और सड़क की गुणवत्ता सुधारने की मांग की है, ताकि बरसात से पहले आवागमन सुचारू हो सके।

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